ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह तथा तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर और भाजपा नेताओं के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा का कर्मचारी और अधिकारी विरोधी चरित्र एक बार फिर सार्वजनिक रूप से उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का इतिहास कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों की उपेक्षा से भरा रहा है। चाहे पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा हो या कर्मचारियों एवं अधिकारियों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण अधिकारों का प्रश्न, भाजपा ने हमेशा उनके हितों के साथ अन्याय किया है।
अनिरुद्ध सिंह एवं राजेश धर्माणी ने कहा कि भाजपा नेता अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके वैधानिक एवं प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन से रोकने तथा उन पर राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। सार्वजनिक मंचों से अधिकारियों को चेतावनी देना और उन्हें भविष्य के परिणामों का भय दिखाना लोकतांत्रिक मूल्यों तथा प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में दर्ज मुकदमे सही हैं या गलत, इसका निर्णय केवल न्यायालयों को करना है, नेताओं को नहीं। कानून के अनुसार दर्ज मामलों की जांच जारी है और न्यायिक प्रक्रिया अपना कार्य कर रही है। नेता प्रतिपक्ष को यह समझना चाहिए कि न्यायपालिका स्वतंत्र है और किसी मुकदमे की वैधता या अवैधता का फैसला राजनीतिक भाषणों से नहीं, बल्कि अदालतों में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होता है।
मंत्रियों ने जय राम ठाकुर से पूछा कि क्या उनके शासनकाल में मुकदमे दर्ज नहीं होते थे? क्या उस समय कानून व्यवस्था की प्रक्रिया लागू नहीं होती थी? यदि भाजपा सरकार के दौरान कानून के तहत कार्रवाई उचित मानी जाती थी, तो आज वही प्रक्रिया गलत कैसे हो गई? यह भाजपा की दोहरी मानसिकता और राजनीतिक अवसरवादिता का स्पष्ट प्रमाण है।
अनिरुद्ध सिंह और राजेश धर्माणी ने कहा कि भाजपा इस समय गंभीर आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और आपसी संघर्ष से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा नेतृत्व अनावश्यक विवाद खड़े कर रहा है तथा अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रदेश की जागरूक जनता भाजपा की इस राजनीति को अच्छी तरह समझती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कानून, प्रशासनिक निष्पक्षता और कर्मचारियों एवं अधिकारियों की गरिमा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को राजनीतिक दबाव में काम करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें निष्पक्ष रूप से अपने दायित्व निभाने के लिए पूर्ण संरक्षण प्रदान करेगी।
दोनों मंत्रियों ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को आरडीजी तथा जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में केंद्र सरकार से लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई थी, इसके बावजूद कर्मचारियों को वेतन आयोग के एरियर तथा अन्य देय वित्तीय लाभों का भुगतान नहीं किया गया। इसके विपरीत, वर्तमान कांग्रेस सरकार ने न केवल पुरानी पेंशन योजना लागू की है, बल्कि कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों की रक्षा तथा उनके कल्याण के लिए निरंतर ठोस कदम भी उठा रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार कर्मचारियों, अधिकारियों और आम जनता के विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है, जबकि भाजपा केवल धमकियों और दबाव की राजनीति कर रही है। प्रदेश की जनता समय आने पर इसका उचित जवाब देगी।

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