जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री मंचों से बड़े-बड़े दावे करते हैं और हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध राज्य बनाने की घोषणाएं करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश में वर्तमान में कोई औद्योगिक नीति ही नहीं है। इसके चलते 30,000 से ज्यादा छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश की औद्योगिक नीति गत वर्ष 31 दिसंबर को समाप्त हो गई है, जिसकी अवधि सरकार द्वारा तीन बार बढ़ाई जा चुकी है। सुक्खू सरकार की न कोई प्राथमिकता है और न ही विजन है। इसीलिए ऐसे हालात पैदा हो रहे हैं कि उद्योग सत्ता-संरक्षित लोगों द्वारा सिर्फ उगाही का साधन बन गए हैं। प्रदेश में उद्योगों के विकास के लिए सरकार की तरफ से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर चल रही सुख की सरकार में न तो कोई औद्योगिक नीति है और न ही सरकार की उद्योगों को लेकर कोई अच्छी नीयत।
सरकार प्रदेश के हितों को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक नीति लाए, ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने और रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्योगों को भी भविष्य की परिस्थितियों को लेकर स्पष्टता मिल सके

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