शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर मित्रों को सेटल करने के लिए मेरिट लिस्ट ही चोरी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बीते दो दिनों में लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी को सेवा विस्तार देने और हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया को अकारण रद्द करने के मामलों में माननीय उच्च न्यायालय के फैसलों ने मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली और तानाशाही को उजागर किया है। उन्होंने न्यायालय के फैसलों का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लगातार मित्रों और करीबियों के लिए नियम-कायदों की परवाह किए बिना काम कर रहे हैं। जनहित के नाम पर जिस तरीके से मित्रहित की योजना चल रही है, वह पूरा प्रदेश देख रहा है। व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार की नीयत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों और संवैधानिक आयोगों के पदों पर होने वाली भर्तियों में शुचिता और पारदर्शिता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इसी तरह जल शक्ति विभाग के एक अधिकारी को दिए गए सेवा विस्तार पर माननीय उच्च न्यायालय ने सवाल उठाते हुए उनके दागदार सेवाकाल को देखते हुए किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से वंचित रखने का आदेश भी दिया।
जिस तरह मुख्यमंत्री ने जनहित के नाम पर लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी को सेवा विस्तार दिया और न्यायालय ने उस फैसले की आलोचना की, वह अपने आप में मुख्यमंत्री के तानाशाहीपूर्ण बर्ताव की कहानी कहता है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (एचपीईआरसी) के अध्यक्ष की नियुक्ति में मनचाहे अधिकारी को सेटल करने के लिए रद्द की गई नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए गए सवाल ने सरकार की मित्रहित योजना को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह हास्यास्पद है कि एचपीईआरसी के अध्यक्ष पद के लिए चल रही चयन प्रक्रिया में चयन समिति ने साक्षात्कार के बाद उम्मीदवारों की योग्यता और अनुभव का आकलन कर सिफारिश की थी, लेकिन उस सिफारिश को रद्द कर मनमानी नियुक्ति की गई। इस प्रकार की नियुक्तियों के जो भी मामले कानूनी समीक्षा के दायरे में आएंगे, ज्यादातर जगह इसी तरह की खोट सामने आएगी। न्यायालय का आदेश मुख्यमंत्री के इस पक्षपातपूर्ण रवैये को बेनकाब कर रहा है

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