कांग्रेस जनता को गुमराह करने के बजाय एसआईआर पर तथ्य रखे, मतदाता सूची की शुद्धता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान अधिकार की रक्षा जरूरी : डॉ. सिकंदर कुमार

शिमला, 15 अक्टूबर 2026। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. सिकंदर कुमार ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, समरहिल में हमीरपुर स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम “हमीर संगम” को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के साथ उनका संबंध केवल एक शिक्षण संस्थान तक सीमित नहीं, बल्कि उनके जीवन, शिक्षा, संघर्ष, नेतृत्व और सार्वजनिक सेवा की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1985 से उनका इस विश्वविद्यालय के साथ गहरा नाता रहा है। इसी विश्वविद्यालय में उन्हें शिक्षा ग्रहण करने, विद्यार्थियों के बीच कार्य करने तथा संस्थान का नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त हुआ। विश्वविद्यालय से मिली शिक्षा, संस्कार और अनुभवों ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और आज राज्यसभा सांसद के रूप में देश एवं प्रदेश की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान, प्रशासन, राजनीति, सामाजिक सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाएं देश को दी हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और शिक्षा के साथ अनुशासन, परिश्रम, चरित्र निर्माण तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता विकसित करने और राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार होने का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक, नवाचार, अनुसंधान और कौशल विकास को अपनाकर हिमाचल प्रदेश तथा देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

भाजपा प्रदेश महामंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं को विकसित भारत के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति माना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, उद्यमिता, अनुसंधान और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, अटल इनोवेशन मिशन और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी पहलों ने युवाओं के लिए नए अवसरों का विस्तार किया है।

डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि भारत के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें सही मार्गदर्शन, आधुनिक शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए पर्यटन, बागवानी, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल उद्योग, प्राकृतिक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से नौकरी प्राप्त करने के साथ-साथ रोजगार सृजन करने की दिशा में भी आगे बढ़ने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक विकास, डिजिटल भुगतान, बुनियादी ढांचे के विस्तार और वैश्विक निवेश के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में दसवें स्थान के आसपास था और इसके बाद देश की अर्थव्यवस्था का आकार उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति का लाभ युवाओं तक पहुंचाने के लिए शिक्षा, उद्यमिता, विनिर्माण और कौशल विकास को मजबूत करना आवश्यक है।

डॉ. सिकंदर कुमार ने कांग्रेस के आर्थिक प्रबंधन की आलोचना करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय आर्थिक विकास, महंगाई, भ्रष्टाचार के आरोपों और नीतिगत अनिश्चितता जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल उठते रहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल प्रशासन, वित्तीय समावेशन और औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक उपलब्धियों का मूल्यांकन वास्तविक आंकड़ों और आम नागरिक के जीवन में आए बदलाव के आधार पर किया जाना चाहिए।

एसआईआर अर्थात मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का उल्लेख करते हुए डॉ. सिकंदर कुमार ने कांग्रेस पार्टी पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि देश में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस भ्रम फैला रही है। उन्होंने लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने और उनमें करीब सात करोड़ व्यक्तियों के सत्यापन के दौरान उपस्थित नहीं मिलने का दावा करते हुए कहा कि शेष मामलों में दोहरी प्रविष्टियों और मृत मतदाताओं के नाम होने जैसी परिस्थितियां सामने आई हैं।

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