शिमला 26 अगस्त, 2026
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 59 के तहत वाहनों की आयु सीमा निर्धारित करने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है। राज्य सरकार अपने स्तर पर वाहनों की आयु में बदलाव नहीं कर सकती है। इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार ने कांट्रैक्ट कैरिज वाहनों की आयु सीमा 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष करने का मामला पहले ही भारत सरकार के समक्ष उठाया है तथा आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है।
सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि केंद्र सरकार ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (एआईटीपी) के तहत आने वाले वाहनों की आयु सीमा 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी है, जो एक अप्रैल, 2026 से लागू है। प्रदेश सरकार का मानना है कि इसी प्रकार कांट्रैक्ट कैरिज वाहनों के लिए भी 15 वर्ष की आयु सीमा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक कांट्रैक्ट कैरिज के संबंध में केंद्र सरकार का निर्णय नहीं आता, इच्छुक ऑपरेटर नियमानुसार एआईटीपी के तहत आवेदन कर सकते हैं। वाहन और एआईटीपी पोर्टल का संचालन एवं प्रबंधन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा किया जाता है। एक अप्रैल, 2026 से अब तक 1,009 ऑपरेटर एआईटीपी पोर्टल के माध्यम से इस व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कांट्रैक्ट कैरिज ऑपरेटरों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और इस विषय पर केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखती रहेगी। प्रदेश में वाहनों की फिटनेस जांच के लिए स्वचालित परीक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 62 के अनुसार वाहनों की फिटनेस जांच स्वचालित परीक्षण केंद्रों के माध्यम से किए जाने की व्यवस्था है। हिमाचल प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में तीन स्वचालित परीक्षण केंद्र बद्दी, हरोली तथा नादौन में और निजी क्षेत्र में पांच स्वचालित परीक्षण केंद्र कांगड़ा के रानीताल, मंडी के कांगू, बिलासपुर, नालागढ़ तथा पांवटा साहिब में स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है।
निजी क्षेत्र के दो स्वचालित परीक्षण केंद्र रानीताल (कांगड़ा) और कांगू (मंडी) कार्यशील हो चुके हैं, जबकि अन्य स्थानों पर कार्य प्रगति पर है। प्रदेश में निजी क्षेत्र में पांच और स्वचालित परीक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इनमें कांगड़ा मेें जसूर/डमटाल और पालमपुर, सिरमौर में काला अंब, कुल्लू में भुंतर तथा चंबा में बनीखेत शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि कांगड़ा जिला में वाहनों की फिटनेस को पुरानी पद्धति से करने का मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया है और केंद्र सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है।
