शिमला 17 अगस्त, 2026
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप, कौशल-आधारित और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आधुनिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों, उभरती तकनीकों, अनुसंधान, खेल तथा विद्यार्थियों के कल्याण पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
आज यहां हिमाचल प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की 9वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग और शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिए कि पाठ्यक्रमों को लगातार उन्नत किया जाए। विद्यार्थियों को केवल वर्तमान रोजगार के अवसरों के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य की नौकरियों, तकनीकों और चुनौतियों के लिए भी तैयार किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग तथा शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक आधुनिक, व्यावसायिक और रोजगारपरक पाठ्यक्रम चिन्हित कर शुरू किए जाएं तथा बदलती तकनीक और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप मौजूदा विषयों को भी समय-समय पर अपडेट किया जा सके।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि एआई अब भविष्य का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह वर्तमान में ही हमारे काम करने और सीखने के तरीके को बदल रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इस बदलाव और इससे शिक्षा व्यवस्था के सामने उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करना आवश्यक है।
उन्होंने निर्देश दिए कि एआई को केवल कुछ विशेष पाठ्यक्रमों तक सीमित न रखा जाए बल्कि जहां भी संभव हो, इसे मौजूदा विषयों और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि कृषि एवं बागवानी में एआई आधारित खेती और डेटा विश्लेषण, पर्यटन में डिजिटल एवं एआई आधारित सेवाओं को शामिल किया जा सकता है। इसी प्रकार वानिकी, आपदा प्रबंधन, जलवायु अध्ययन, स्वास्थ्य सेवाएं, योग एवं वेलनेस, शिक्षा, कानून, वित्तीय साक्षरता, सामाजिक कार्य, मनोविज्ञान, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, खेल, आतिथ्य सत्कार, रचनात्मक कला, डिजाइन, संगीत, उद्यमिता और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को भी आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाया जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, ड्रोन तकनीक, जीआईएस, डिजिटल मार्केटिंग, उद्यमिता तथा अन्य उभरते क्षेत्रों से जुड़े पाठ्यक्रमों की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि उन्हें राज्य की आवश्यकताओं और रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप शुरू किया जा सके।
उन्होंने खेल और खेल आधारित शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध करवाने तथा स्पोर्ट्स साइंस, फिटनेस, पोषण, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट जैसे आधुनिक क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जानी चाहिए।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था को रोजगार बाजार में बदलाव का इंतजार नहीं करना चाहिए। हमें भविष्य की चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाकर अपने युवाओं को उसके लिए तैयार करना होगा।
रोहित ठाकुर ने हिमाचल और हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इनमें जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, आपदा प्रबंधन, कृषि, बागवानी और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। उन्होंने अनुसंधान के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करने, अधिक अनुदान उपलब्ध करवाने, नवाचार एवं स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने तथा इंटर्नशिप, प्लेसमेंट और संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का आह्वान किया।
शिक्षा मंत्री ने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विद्यार्थियों के एकत्र होने का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को युवाओं की आकांक्षाओं और चिंताओं को समझना होगा तथा उन्हें अपनी बात रखने और सहयोग प्राप्त करने के लिए उचित संस्थागत मंच उपलब्ध करवाने होंगे। हमें अपने दृष्टिकोण में दृढ़ और सकारात्मक होना होगा तथा युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में ले जाना होगा। शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए उन्हें शैक्षणिक, करियर संबंधी और भावनात्मक सहयोग प्रदान करना चाहिए। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में काउंसलिंग और विद्यार्थी सहायता प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, करियर मार्गदर्शन और समग्र व्यक्तित्व विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।
