13 OCT 2022 PIB Delhi

भारत माता की – जय,

भारत माता की – जय।

सिवरी महाराजेरी, इस पवित्तर धरती अपणे, इक हजार सालवे, पुराणे रिवाजां, ते बिराशता जो दिखांदा चम्बा, मैं अप्पू जो, तुस्सा सबनियां-रे बिच्च, आई करी, अज्ज बड़ा, खुश है बुज्झेय करदा।

सबसे पहले तो मैं चम्‍बावासियों से क्षमा चाहता हूं क्‍योंकि इस बार मुझे यहां आने में काफी विलंब रहा, कुछ वर्ष बीत गए बीच में। लेकिन मेरा सौभाग्‍य है कि फिर आज सबके बीच आ करके आप सबके दर्शन करने का, आपके आशीर्वाद प्राप्‍त करने का मुझे अवसर मिला है।

दो दिन पहले मैं उज्‍जैन में महाकाल की नगरी में था और आज मणिमहेश के सानिध्य में आया हूं। आज जब इस ऐतिहासिक चौगान पर आया हूं, तो पुरानी बातें याद आना बहुत स्वाभाविक है। यहां के अपने साथियों के साथ बिताए पल और राजमाह का मदरा, सचमुच में एक अद्भुत अनुभव रहता था।

चंबा ने मुझे बहुत स्नेह दिया है, बहुत आशीर्वाद दिए हैं। तभी तो कुछ महीने पहले मिंजर मेले के दौरान यहां के एक शिक्षक साथी ने चिट्ठी लिखकर चंबे से जुड़ी अनेक बातें मुझसे साझा की थीं। जिसे मैंने मन की बात में देश और दुनिया के साथ भी शेयर किया था। इसलिए आज यहां से चंबा सहित, हिमाचल प्रदेश के दुर्गम गांवों के लिए सड़कों और रोज़गार देने वाले बिजली प्रोजेक्ट्स का उपहार देने का मेरे लिए अत्‍यंत खुशी का अवसर है।

जब मैं यहां आपके बीच रहता था तो कहा करता था कि हमें कभी न कभी उस बात को मिटाना होगा जो कहता है कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम नहीं आती। आज हमने उस बात को बदल दिया है। अब यहां का पानी भी आपको काम आएगा और यहां की जवानी भी जीजान से अपने विकास की यात्रा को आगे बढ़ाएगी। आपका जीवन आसान बनाने वाले इन सारे प्रोजेक्ट्स के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई !

भाइयों और बहनों,

कुछ समय पहले ही भारत ने अपनी आजादी के 75 साल पूरे किए हैं। इस समय हम जिस पड़ाव पर खड़े हैं, ये पड़ाव विकास की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। क्‍योंकि यहीं से एक ऐसी छलांग हमें लगानी है जिसकी शायद पहले कोई कल्‍पना तक नहीं कर सकता था। भारत की आज़ादी का अमृतकाल शुरु हो चुका है, जिसमें हमें विकसित भारत का संकल्प पूरा करना है। एक-एक हिंदुस्‍तानी का संकल्‍प अब पूरा करके रहना है। आने वाले कुछ महीनों में हिमाचल की स्थापना के भी 75 वर्ष पूरे होने वाले हैं। यानि जब देश की आजादी के 100 साल होंगे तो हिमाचल भी अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा होगा। इसलिए आने वाले 25 वर्षों का एक-एक दिन, एक-एक पल हम सबके लिए, सभी देशवासियों के लिए और हिमाचल के लोगों के लिए विशेष रूप से लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

आज जब हम बीते दशकों की तरफ मुड़कर देखते हैं, तो हमारा अनुभव क्या कह रहा है? हमने यहां शांता जी को, धूमल जी को अपनी जिंदगी खपाते देखा है। उनके मुख्‍यमंत्री काल के वो दिन थे जब हिमाचल के लिए हर छोटी चीज के लिए, हिमाचल के अधिकार के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को, कार्यकर्ताओं को ले करके दिल्‍ली में जा करके गुहार लगानी पड़ती थी, आंदोलन करने पड़ते थे। कभी बिजली का हक, कभी पानी का हक तो कभी विकास में हक मिले, भागीदारी मिले, लेकिन तब दिल्ली में सुनवाई नहीं होती थी, हिमाचल की मांगें, हिमाचल की फाइलें भटकती रहती थीं। इसलिए चंबा जैसे प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आस्था के इतने समृद्ध क्षेत्र विकास की दौड में पीछे रह गए। 75 साल बाद मुझे एक aspirational district के रूप में उस पर स्‍पेशल ध्‍यान केंद्रित करना पड़ा क्‍योंकि मैं इसके सामर्थ्‍य ये परिचित था दोस्‍तो।

सुविधाओं के अभाव में आपके यहां रहने वालों का जीवन मुश्किल था। बाहर से आने वाले पर्यटक भला यहां कैसे पहुंच पाते? और हमारे यहां चंबा का गीत अभी जयराम जी याद कर रहे थे-

जम्मू  दी राहेंचंबा कितना अक् दूर,

ये उस स्थिति को बताने के लिए काफी है। यानि यहां आने की उत्सुकता तो बहुत थी, लेकिन यहां पहुंचना इतना आसान नहीं था। और जब ये जयराम जी ने बताया केरल की बेटी दिव्‍या के विषय में, देविका ने कैसे और एक भारत श्रेष्‍ठ भारत का सपना ऐसे ही पूरा होता है। चंबा का लोकगीत क्रेरल की धरती पर, जिस बच्‍ची ने कभी हिमाचल नहीं देखा, कभी जिसका हिंदी भाषा से नाता नहीं रहा, वो बच्‍ची पूरे मनोयोग से जब चंबा के गीत गाती हो, तो चंबा का सामर्थ्‍य कितना है, उसका हमें सबूत मिल जाता है दोस्‍तो। और मैं चंबा का आभारी हूं, उन्‍होंने बेटी देविका की इतनी तारीफ की इतनी वाहवाही की कि पूरे देश में एक भारत, श्रेष्‍ठ भारत का मैसेज चला गया। एक भारत-श्रेष्ठ भारत के प्रति चंबा के लोगों की ये भावना देखकर, मैं भी अभीभूत हो गया था।

साथियों,

आज हिमाचल के पास डबल इंजन की सरकार की ताकत है। इस डबल इंजन की ताकत ने हिमाचल के विकास को डबल तेजी से आगे बढ़ाया है। पहले सरकारें सुविधाएं वहां देती थीं, जहां काम आसान होता था। जहां मेहनत कम लगती थी और राजनीतिक लाभ ज्‍यादा मिल जाता था