शिमला, 13 मई 2026

हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज एवं स्थानीय शहरी निकाय चुनाव 2026 को लेकर भाजपा ने चुनावी मैदान में कांग्रेस पर स्पष्ट बढ़त बना ली है। संगठनात्मक तैयारी, प्रत्याशी चयन, प्रचार अभियान, अनुशासनात्मक कार्रवाई और चुनावी विजन के स्तर पर भाजपा लगातार कांग्रेस से आगे दिखाई दे रही है। भाजपा नेताओं का मानना है कि जिस प्रकार पार्टी ने समय रहते अपने उम्मीदवारों की घोषणा की और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक सक्रिय किया, उससे चुनावी माहौल भाजपा के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है।

भाजपा द्वारा जारी चुनावी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 12 जिला परिषद, 25 नगर परिषद, 22 नगर पंचायत, 92 बीडीसी तथा 3759 पंचायतों में पार्टी ने व्यापक स्तर पर रणनीति तैयार की है। इन संस्थाओं के अंतर्गत आने वाले हजारों वार्डों में भाजपा ने या तो अपने अधिकृत उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं अथवा समर्थित प्रत्याशियों को चुनावी समर्थन दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि पंचायत प्रधानों के चुनाव में भी पार्टी ने समन्वय बनाते हुए अधिकांश स्थानों पर एक ही समर्थित उम्मीदवार उतारकर संगठनात्मक एकजुटता का परिचय दिया है।

नगर निगम चुनावों में भाजपा की सक्रियता विशेष रूप से देखने को मिली है। सोलन, मंडी, धर्मशाला और पालमपुर नगर निगमों के कुल 64 वार्डों में भाजपा ने कांग्रेस से पहले अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। भाजपा नेताओं के अनुसार कई वार्डों में कांग्रेस को उम्मीदवार खोजने में भी भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा, जबकि भाजपा ने समय रहते चुनावी तैयारी पूरी कर ली थी।

भाजपा का दावा है कि जिला परिषद चुनावों में भी कांग्रेस पार्टी संगठनात्मक रूप से कमजोर दिखाई दी। जहां भाजपा ने लगभग प्रत्येक जिला परिषद वार्ड में अपने समर्थित प्रत्याशी उतार दिए, वहीं कांग्रेस अब तक एक समग्र सूची तक जारी नहीं कर पाई। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह स्थिति स्पष्ट करती है कि कांग्रेस पार्टी चुनावी रणनीति और जमीनी संगठन दोनों स्तरों पर भाजपा से काफी पीछे चल रही है।

प्रदेश में भाजपा का प्रचार अभियान लगातार तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा, सह प्रभारी संजय टंडन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल लगातार विभिन्न नगर निगम क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। पार्टी द्वारा आयोजित बैठकों, सम्मेलन, जनसभाओं और रैलियों में वरिष्ठ नेतृत्व लगातार भागीदारी कर रहा है। भाजपा के सांसद सुरेश कश्यप, डॉ. राजीव भारद्वाज और डॉ. सिकंदर कुमार भी चुनावी क्षेत्रों में सक्रिय जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं, जिससे भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है।

इसके विपरीत कांग्रेस का चुनाव प्रचार अपेक्षाकृत धीमा दिखाई दे रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के बड़े नेताओं की सक्रियता काफी देर से शुरू हुई है। मुख्यमंत्री के चुनावी दौरे भी अब जाकर प्रारंभ हुए हैं और अभी तक कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की प्रदेश में कोई विशेष सक्रियता दिखाई नहीं दी। यहां तक कि कांग्रेस के प्रभारी भी चुनावी माहौल बनने के बाद प्रदेश पहुंचे हैं।

भाजपा ने संगठनात्मक अनुशासन के स्तर पर भी कांग्रेस की तुलना में अधिक सक्रियता दिखाई है। पार्टी की अनुशासन समिति का गठन कांग्रेस से पहले किया गया और चुनावों के दौरान अनुशासनहीनता पर तत्काल कार्रवाई भी की गई। पालमपुर नगर निगम में एक, सोलन नगर निगम में चार तथा धर्मशाला नगर निगम में पांच नेताओं को निलंबित किया गया। इसके अतिरिक्त सिरमौर जिला परिषद चुनाव को ध्यान में रखते हुए एक निष्कासन भी किया गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठनात्मक अनुशासन से कोई समझौता नहीं होगा।

दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी में लगातार शिकायतें और अंदरूनी असंतोष की खबरें सामने आती रहीं, लेकिन अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामले में कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस की यही स्थिति कार्यकर्ताओं में भ्रम और असंतोष का कारण बन रही है।

भाजपा ने चुनावी विजन के स्तर पर भी कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया है। भाजपा सोलन, धर्मशाला, पालमपुर और मंडी नगर निगमों के लिए अपने संकल्प पत्र जारी कर चुकी है और जनता के बीच उन्हें लेकर व्यापक प्रचार अभियान चला रही है। इन संकल्प पत्रों में मूलभूत सुविधाओं, यातायात, पेयजल, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। इसके मुकाबले कांग्रेस अब तक केवल सोलन में ही अपना दृष्टिपत्र जारी कर पाई है।

भाजपा ने नगर निगमों के 64 वार्डों में अपनी प्रचार टोली का गठन भी कर दिया है और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है। घर-घर जनसंपर्क, छोटी बैठकों और वार्ड स्तर के अभियानों के माध्यम से भाजपा लगातार जनता तक पहुंच बना रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी तैयारी, संगठनात्मक मजबूती और प्रचार अभियान की गति को देखते हुए भाजपा इस समय कांग्रेस की तुलना में अधिक संगठित और सक्रिय दिखाई दे रही है।

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