शिमला, 2 नवंबर 2026। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर किसानों, बागवानों और पशुपालकों के साथ वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने किसानों से बड़ी-बड़ी गारंटियां की थीं, लेकिन चार वर्ष बीतने को हैं और प्रदेश का किसान स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस ने चुनावों के समय दावा किया था कि सरकार बनने पर बागवान अपने फलों का मूल्य स्वयं निर्धारित करेंगे, पशुपालकों से प्रतिदिन 10 लीटर दूध खरीदा जाएगा और गोबर ₹2 प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा। इसके अतिरिक्त किसानों और बागवानों को राहत देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने के बड़े वादे किए गए थे।

उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस सरकार बताए कि कितने बागवानों को अपनी फसल का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार मिला, कितने पशुपालकों से प्रतिदिन 10 लीटर दूध की खरीद सुनिश्चित हुई और गोबर खरीद योजना के अंतर्गत कितने किसानों को कितना भुगतान किया गया।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस ने चुनावों में किसान को सेब का मालिक, दूध का व्यापारी और गोबर से कमाई करने वाला उद्यमी बनाने के सपने दिखाए थे। अब किसान चार वर्षों से गारंटियों की फाइलें और नेताओं के भाषण ही देख रहा है।”

केंद्र ने 24वीं किस्त में हिमाचल के किसानों को दिए ₹220 करोड़

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।

उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश के लगभग 11 लाख किसानों के खातों में ₹220 करोड़ हस्तांतरित किए गए। प्रत्येक पात्र लाभार्थी को ₹2,000 की सहायता मिली।

उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष ₹6,000 तीन किस्तों में दिए जाते हैं। सभी 24 किस्तें प्राप्त करने वाले किसान परिवार को अब तक ₹48,000 की सहायता मिल चुकी है।

भारद्वाज ने बताया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश के किसानों को 24 किस्तों में लगभग ₹5,230 करोड़ की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर 24वीं किस्त के माध्यम से 9.34 करोड़ से अधिक किसानों को ₹18,690 करोड़ से अधिक की सहायता प्रदान करने की घोषणा की गई थी।

हिमाचल में 1,43,952 किसानों की ई-केवाईसी लंबित होने का आंकड़ा आया था सामने

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने के लिए ई-केवाईसी, आधार सीडिंग और भूमि अभिलेखों का सत्यापन अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जुलाई 2023 में राज्यसभा में दिए गए आधिकारिक उत्तर के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 1,43,952 किसानों की ई-केवाईसी लंबित थी।

भारद्वाज ने कहा कि यह आंकड़ा गंभीर चिंता का विषय रहा है और प्रदेश सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले तीन वर्षों में इनमें से कितने किसानों की ई-केवाईसी पूरी करवाई गई तथा वर्तमान में कितने पात्र किसानों की सम्मान निधि रुकी हुई है।

उन्होंने सवाल किया, “जब केंद्र सरकार किसानों को ₹2,000 की किस्त सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचा रही है, तो प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती कि दस्तावेजों की कमी के कारण कोई पात्र किसान इस सहायता से वंचित न रहे?”

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने किसानों की ई-केवाईसी और दस्तावेजी समस्याओं के समाधान को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी है।

प्रत्येक पंचायत में विशेष ई-केवाईसी शिविर लगाए सरकार

संदीपनी भारद्वाज ने मांग की कि प्रदेश सरकार तत्काल पंचायत स्तर पर विशेष अभियान शुरू करे।

उन्होंने कहा कि कृषि विभाग, राजस्व विभाग, पंचायतों, बैंकों और कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से किसानों की ई-केवाईसी, आधार-बैंक लिंकिंग, भूमि अभिलेख सत्यापन और अन्य तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी 12 जिलों में लंबित मामलों का अद्यतन विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा पात्र किसानों की रुकी हुई किस्तें जारी करवाने के लिए केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित किया जाए।

भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश सरकार को यह भी बताना चाहिए कि 2022 की कृषि और पशुपालन संबंधी गारंटियों पर कितना बजट खर्च हुआ, कितने किसान लाभान्वित हुए और कितनी घोषणाएं अभी अधूरी हैं।

उन्होंने कहा कि “कांग्रेस सरकार गारंटियों के नाम पर किसानों से वोट लेकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। किसान को भाषण नहीं, उसकी फसल का उचित मूल्य, योजनाओं का वास्तविक लाभ और समय पर आर्थिक सहायता चाहिए।”

भारद्वाज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठाती रहेगी तथा प्रदेश सरकार से प्रत्येक गारंटी का हिसाब मांगेगी।

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