शिमला 24 अक्तूबर, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार और समावेशी विकास की दिशा में निरंतर अग्रसरः राज्यपाल
अटल टनल और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से हिमाचल के दूरदराज एवं दुर्गम क्षेत्रों में खुले विकास के नए द्वार
‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर दिया बल
पारंपरिक कौशल के संरक्षण और आजीविका सुदृढ़ करने के लिए कारीगरों से केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने का किया आग्रह

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज चंबा के ऐतिहासिक चौगान में ‘विकसित भारत-विकसित हिमाचल’ विषय पर आयोजित तीसरे डेस्टिनेशन हिमाचल एक्सपो-2026 के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय संसाधनों और मानवीय क्षमता का प्रभावी उपयोग कर युवाओं, उद्यमियों, किसानों, कारीगरों और महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @ 2047 के संकल्प को साकार करने में हिमाचल प्रदेश की भागीदारी और अधिक सशक्त होगी।
राज्यपाल ने कहा कि यह एक्सपो लोगों को रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे आयोजन युवाओं और स्थानीय समुदायों को उपलब्ध अवसरों की जानकारी देने के साथ-साथ विकास की नई संभावनाओं के द्वार भी खोलते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार और समावेशी विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत @ 2047 का लक्ष्य केवल एक परिकल्पना नहीं, बल्कि राष्ट्र के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है, जब देश का प्रत्येक राज्य, जिला और गांव विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाए।
राज्यपाल ने संपर्क सुविधाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अटल टनल और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी पहलों ने हिमाचल प्रदेश के दूरदराज एवं दुर्गम क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं पैदा की हैं। बेहतर सड़क संपर्क से बाजारों, पर्यटन स्थलों और आर्थिक गतिविधियों तक पहुंच आसान हुई है। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों तक भी पहुंचना चाहिए, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
राज्यपाल ने चंबा की अपार पर्यटन संभावनाओं का उल्लेख करते हुए ग्रामीण पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और होमस्टे को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है। हिमालय का संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र हमारी अमूल्य धरोहर है, इसलिए विकास की प्रत्येक गतिविधि पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।
राज्यपाल ने चंबा रुमाल सहित प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प, लकड़ी की नक्काशी, स्थानीय खाद्य उत्पादों, कृषि एवं बागवानी उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी पहचान और बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता मानकों, डिजिटल मार्केटिंग और प्रभावी विपणन व्यवस्था को अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को प्रभावी ढंग से अपनाकर स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और उत्पादकों को व्यापक बाजार उपलब्ध करवाया जा सकता है। इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी और लोगों की आय में भी वृद्धि होगी।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से कौशल उन्नयन, आधुनिक उपकरणों, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ने के अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
उन्होंने चंबा के कारीगरों से आग्रह किया कि वे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं, ताकि अपनी आजीविका को सुदृढ़ करने के साथ-साथ पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक कला एवं कौशल को भी संरक्षित रखा जा सके।

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