प्रदेश सरकार ने चिट्टा एवं अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध अभियान को और तेज करते हुए जीरो टॉलरेंस की नीति को सख्ती से लागू करना है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नशा तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने, युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने तथा नशे की समस्या से प्रभावित व्यक्तियों को उपचार और पुनर्वास के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में वापिस लाने के लिए बहुआयामी रणनीति के तहत कार्य कर रही है।
नशे के विरुद्ध इस अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मार्च, 2025 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इनमें हिमाचल प्रदेश ड्रग्स एंड कंट्रोल्ड सब्सटेंसेज विधेयक, 2025 तथा हिमाचल प्रदेश ऑर्गेनाइज्ड क्राइम्स (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल) विधेयक, 2025 शामिल हैं। पहले विधेयक का उद्देश्य नशीले पदार्थों की रोकथाम, अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई तथा उपचार एवं पुनर्वास व्यवस्था को सुदृढ़ करना है, जबकि दूसरे विधेयक का उद्देश्य संगठित आपराधिक नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई को मजबूत करने पर केंद्रित है।
प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि नशा तस्करी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक, आर्थिक अथवा सामाजिक प्रभाव के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जाएगा। इसी प्रतिबद्धता के तहत तीन वर्षों की अवधि में एनडीपीएस से संबंधित 5,642 मामले दर्ज किए गए और 8,250 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दायरे में 139 सरकारी कर्मचारी भी आए, जिनमें राज्य सरकार के 15 कर्मचारियों और पुलिस विभाग के 22 कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रवर्तन एजेंसियां बार-बार नशा तस्करी में संलिप्त रहने वाले आरोपियों, नशे की संगठित आपूर्ति श्रृंखला और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर विशेष निगरानी रख रही है। इसके साथ ही पंचायत स्तर तक संदिग्ध नशा तस्करी नेटवर्क की पहचान करने तथा स्थानीय निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
नशा तस्करी के विरुद्ध रणनीति को केवल गिरफ्तारियों तक सीमित न रखते हुए तस्करों की आर्थिक शक्ति पर प्रहार करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। मादक पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम से संबंधित पीआईटी-एनडीपीएस कानून के अंतर्गत दिसंबर, 2025 तक 46 बड़े नशा तस्करों को निरुद्ध किए जाने तथा लगभग 46 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को जब्त किए जाने की जानकारी दी गई।
वित्तीय जांच अभियान का एक महत्वपूर्ण घटक बनकर उभरी है। वर्ष 2024 से 2026 के दौरान हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं पुलिस जिलों में कुल 115 मामलों में लगभग 91.24 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां फ्रीज की गईं। पुलिस जिला नूरपुर में 14 मामलों में 22.28 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां फ्रीज की गईं। इसके अतिरिक्त, सोलन में 15 मामलों में 17.86 करोड़ रुपये, शिमला में 16 मामलों में 12.61 करोड़ रुपये, ऊना में 2 मामलों में 10.98 करोड़ रुपये, सिरमौर में 7 मामलों में 8.84 करोड़ रुपये, कांगड़ा में 8 मामलों में 6.24 करोड़ रुपये, मंडी में 8 मामलों में 3.62 करोड़ रुपये, पुलिस जिला बद्दी में 21 मामलों में 5.12 करोड़ रुपये, बिलासपुर में 19 मामलों में 2.19 करोड़ रुपये, पुलिस जिला देहरा में 3 मामलों में 89.65 लाख रुपये तथा कुल्लू में 2 मामलों में 19.02 लाख रुपये मूल्य की संपत्तियां फ्रीज की गईं।
वर्ष 2024 में 12 मामलों में 25.43 करोड़ रुपये, वर्ष 2025 में 27 मामलों में 23.98 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026 में 76 मामलों में 41.42 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां फ्रीज की गईं। ये प्रयास वित्तीय जांच को सुदृढ़ करने तथा जांच के मामलों से संबंधित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें फ्रीज करने के प्रति राज्य सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सरकार ने आम नागरिकों को भी नशे के विरुद्ध अभियान से जोड़ने की पहल की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने 1 दिसंबर, 2025 को धर्मशाला में आयोजित चिट्टा विरोधी जागरूकता वॉकाथॉन के दौरान चिट्टा सूचना पुरस्कार योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के अंतर्गत 10 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार का प्रावधान किया गया है। नागरिक आपातकालीन हेल्पलाइन 112 के माध्यम से सूचना दे सकते हैं और सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने पर विशेष बल दिया गया है। इसके अतिरिक्त, पुलिस और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से एंटी-चिट्टा वालंटियर टीम गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि नशा तस्करी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय रहते प्राप्त की जा सके।
प्रदेश सरकार का मानना है कि नशे की समस्या का स्थायी समाधान केवल दंडात्मक कार्रवाई से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना और समाज में व्यापक जागरूकता पैदा करना भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त हिमाचल पहल के माध्यम से युवाओं को खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। शिमला, धर्मशाला, हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर में आयोजित जागरूकता वॉकाथॉन के माध्यम से भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जनचेतना बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना, परिवारों को नशे के खतरों के प्रति जागरूक करना तथा शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से नशामुक्ति के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाना है।
नशे की समस्या से प्रभावित व्यक्तियों को उपचार, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन में वापसी का अवसर उपलब्ध करवाना भी प्रदेश सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिमला जिला के मशोबरा स्थित नव-जीवन महिला नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में महिलाओं के लिए विशेष देखभाल की व्यवस्था की गई है, जिसमें चिकित्सा उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श, आवास और पुनर्वास संबंधी सहायता शामिल है। इसके अतिरिक्त, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में एक अन्य नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की योजना है, जबकि सिरमौर जिला के कोटला बड़ोग में आधुनिक सुविधाओं से युक्त 100 बिस्तर क्षमता का नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र विकसित किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य उपचार सुविधाओं की क्षमता बढ़ाना और नशे से प्रभावित लोगों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायता उपलब्ध करवाना है।
इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने नशामुक्ति, रोकथाम और पुनर्वास संबंधी प्रयासों को मजबूत करने के लिए नशामुक्ति रोकथाम एवं पुनर्वास बोर्ड का गठन भी किया है। जिला स्तर पर नशामुक्ति सेवाओं के विस्तार के माध्यम से उपचार, परामर्श और स्वस्थ जीवन की ओर लौटने में सहायता उपलब्ध करवाने पर बल दिया जा रहा है। पुनर्वास की यह व्यवस्था इस सोच पर आधारित है कि नशे की गिरफ्त में आए व्यक्तियों को समय पर उपचार, परिवार का सहयोग और समाज में दोबारा स्वीकार्यता मिले, ताकि वे नशामुक्त जीवन की ओर आगे बढ़ सकें। इस प्रकार सरकार की रणनीति में जहां नशा तस्करों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई है, वहीं नशे से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास को भी समान महत्व दिया जा रहा है।
