अपनी हार पर मंथन करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ना कांग्रेस की आदत : बिंदल

शिमला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के द्वारा पूरे देश के अंदर कई दिनों से जो हो-हल्ला मचा रखा था, उस सारे ड्रामे का अंत हो गया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर सहित आयोग के निर्णय पूर्ण आयोग के निर्णय हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग विचार और टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। 

डॉ. बिंदल ने कहा, “इस स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व और प्रादेशिक नेतृत्व की सारी पोल खुल गई है। बिना वजह देशव्यापी ऐसा वातावरण खड़ा करना, जिसमें संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा किया जाए, कांग्रेस की आदत बन गई है।”

उन्होंने कहा, “संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग हो, माननीय सर्वोच्च न्यायालय हो या अन्य न्यायालय—कांग्रेस लगातार उन पर आक्षेप और टिप्पणी करके ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करती है। वास्तव में कांग्रेस पार्टी अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ने की तैयारी कर रही थी।”

डॉ. बिंदल ने कहा, “कांग्रेस कभी ईवीएम की बात करती है, कभी ‘वोट चोरी’ की बात करती है और कभी एसआईआर की बात करती है। लेकिन देश की जनता कांग्रेस पार्टी की वास्तविकता को अच्छे से जान चुकी है। अपनी खीझ मिटाने के लिए और अपनी हार पर सही अर्थों में मंथन न करके संवैधानिक संस्थाओं पर उसका ठीकरा फोड़ने का कृत्य कांग्रेस लगातार कर रही है।”

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से 26 सितंबर को एसआईआर तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न विषयों पर निर्णयों और स्पष्टीकरण की जानकारी भी सामने रखी गई। हालांकि आयोग के भीतर पूर्व में दर्ज टिप्पणियों और आपत्तियों को लेकर विपक्ष की आलोचना जारी है और विपक्षी दल इस विषय पर आगे भी सवाल उठा रहे हैं। 

डॉ. बिंदल ने कहा, “हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस पार्टी भी इसी राजनीति में शामिल है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को भी यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बार-बार सवाल खड़े करके अपनी राजनीतिक असफलताओं से ध्यान नहीं हटाया जा सकता। कांग्रेस को अपनी हार के वास्तविक कारणों पर मंथन करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव परिणाम अपने पक्ष में न आने पर ईवीएम, मतदाता सूची, एसआईआर और चुनाव आयोग पर आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच जाकर अपनी राजनीतिक कमियों पर विचार करना चाहिए।

Leave a Reply