सत्ता में बैठी कांग्रेस कानून से ऊपर नहीं; पुलिस से धक्का-मुक्की, सरकारी वाहन को नुकसान और कार्यालय में आग लगाने की कथित धमकी की निष्पक्ष जांच हो : सुधीर शर्मा
शिमला, 25 सितंबर। भाजपा नेता एवं विधायक सुधीर शर्मा ने कसुम्पटी स्थित निर्वाचन विभाग कार्यालय के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालना अथवा हिंसा या आगजनी की धमकी देना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का आचरण ऐसा हो गया है कि उसे अपने राजनीतिक विरोध और कानून के बीच की सीमा का भी ध्यान नहीं रहा। शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया, सरकारी वाहन को नुकसान पहुंचाया तथा सरकारी कार्यालय में आग लगाने तक की धमकी दी। उन्होंने कहा कि इन आरोपों की वीडियो फुटेज, CCTV रिकॉर्डिंग और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि अपराध के तत्व मिलते हैं तो कानून के अनुसार FIR दर्ज की जानी चाहिए।
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों से यह पुष्ट होता है कि शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कसुम्पटी स्थित निर्वाचन विभाग कार्यालय के बाहर SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के अनुसार निर्वाचन विभाग कार्यालय की दीवारों पर जगह-जगह ‘वोट चोर’ लिखा गया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका गया। हालांकि पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई, सरकारी वाहन को क्षति और कार्यालय में आग लगाने की धमकी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हुई है; शर्मा ने इनकी जांच की मांग की।
सुधीर शर्मा ने कहा, “कांग्रेस पार्टी अब अपने आचरण से ‘गुंडा पार्टी ऑफ इंडिया’ बनने की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। सवाल यह है कि यदि किसी भाजपा कार्यकर्ता पर आरोप लगता तो क्या प्रशासन इसी तरह मौन रहता? कानून का इस्तेमाल राजनीतिक पहचान देखकर नहीं होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि हाल ही में हमीरपुर सदर से भाजपा विधायक आशीष शर्मा के खिलाफ एक कांग्रेस पदाधिकारी की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। ऐसे में कसुम्पटी की घटना में भी उपलब्ध वीडियो, CCTV, सरकारी संपत्ति के नुकसान और अन्य आरोपों की उसी कसौटी पर जांच होनी चाहिए।
सुधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ दल है और इसलिए उसकी जिम्मेदारी और अधिक है। “सत्ता किसी राजनीतिक दल को कानून से ऊपर नहीं रखती। यदि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है तो उसकी क्षति का आकलन किया जाए, जिम्मेदारी तय हो और कानून के तहत कार्रवाई की जाए।”
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन से पहले ही यह सार्वजनिक रूप से घोषित था कि कांग्रेस निर्वाचन विभाग कार्यालय के बाहर SIR के विरोध में कार्यक्रम करेगी और इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी प्रस्तावित थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह कार्यक्रम कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित किया गया था। ऐसे में शर्मा ने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि कार्यक्रम के लिए क्या सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, कितने पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
उन्होंने कहा कि शिमला जिला प्रशासन ने अगस्त में शहर के कई संवेदनशील क्षेत्रों में 30 सितंबर तक रैलियों, प्रदर्शनों और सार्वजनिक सभाओं को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किए थे। इसलिए प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित प्रदर्शन स्थल पर कौन-से आदेश और अनुमतियां लागू थीं तथा उनका पालन हुआ या नहीं।
सुधीर शर्मा ने कहा कि निर्वाचन आयोग और SIR की प्रक्रिया पर कांग्रेस को आपत्ति है तो वह अपने तथ्य, दस्तावेज और कानूनी तर्क संबंधित संवैधानिक एवं वैधानिक मंचों पर रख सकती है। उन्होंने कहा कि असहमति और विरोध लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और कानून का पालन भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने मांग की कि 25 सितंबर की पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कर CCTV फुटेज और वीडियो सुरक्षित किए जाएं, कथित रूप से क्षतिग्रस्त सरकारी वाहन एवं अन्य संपत्ति का आकलन हो, पुलिस की तैनाती और अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए तथा जहां पर्याप्त कानूनी आधार मिले वहां बिना राजनीतिक भेदभाव के FIR और अन्य आवश्यक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन से पहले ही यह सार्वजनिक रूप से घोषित था कि कांग्रेस निर्वाचन विभाग कार्यालय के बाहर SIR के विरोध में कार्यक्रम करेगी और इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी प्रस्तावित थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह कार्यक्रम कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित किया गया था। ऐसे में शर्मा ने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि कार्यक्रम के लिए क्या सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, कितने पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
उन्होंने कहा कि शिमला जिला प्रशासन ने अगस्त में शहर के कई संवेदनशील क्षेत्रों में 30 सितंबर तक रैलियों, प्रदर्शनों और सार्वजनिक सभाओं को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किए थे। इसलिए प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित प्रदर्शन स्थल पर कौन-से आदेश और अनुमतियां लागू थीं तथा उनका पालन हुआ या नहीं।
सुधीर शर्मा ने कहा कि निर्वाचन आयोग और SIR की प्रक्रिया पर कांग्रेस को आपत्ति है तो वह अपने तथ्य, दस्तावेज और कानूनी तर्क संबंधित संवैधानिक एवं वैधानिक मंचों पर रख सकती है। उन्होंने कहा कि असहमति और विरोध लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और कानून का पालन भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने मांग की कि 25 सितंबर की पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कर CCTV फुटेज और वीडियो सुरक्षित किए जाएं, कथित रूप से क्षतिग्रस्त सरकारी वाहन एवं अन्य संपत्ति का आकलन हो, पुलिस की तैनाती और अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए तथा जहां पर्याप्त कानूनी आधार मिले वहां बिना राजनीतिक भेदभाव के FIR और अन्य आवश्यक कार्रवाई की जाए।
सुधीर शर्मा ने कहा, “हिमाचल में दो अलग-अलग कानून नहीं चल सकते—एक विपक्ष के लिए और दूसरा सत्ताधारी कांग्रेस के लिए। प्रशासन की निष्पक्षता तभी दिखाई देगी जब हर शिकायत और हर घटना पर समान कानूनी कसौटी लागू होगी।”
