शिमला, 21 अगस्त। पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक सुधीर शर्मा शुक्रवार को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के शिमला स्थित मुख्यालय पहुंचे। उनके साथ भाजपा के वरिष्ठ विधायक विपिन सिंह परमार, सतपाल सिंह सत्ती, बलबीर वर्मा, डॉ. जनक राज, इंद्रदत्त लखनपाल, राकेश जम्वाल और त्रिलोक जम्वाल भी विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे और सुधीर शर्मा के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
इसके अलावा भाजपा विधायक लोकेंद्र कुमार, दीप राज, आशीष शर्मा और पूर्ण चंद ठाकुर भी विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे।
इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए सुधीर शर्मा ने कहा कि वह कानून और जांच प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हैं। विजिलेंस द्वारा जो भी जानकारी मांगी जा रही है, उसका जवाब दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा पूछे गए कई विषयों की जानकारी पहले भी उपलब्ध करवाई जा चुकी है और आज भी मांगी गई जानकारी दी गई है।
उन्होंने कहा, “हम कानून को मानने वाले लोग हैं। जो तथ्य हैं, वे प्रदेश की जनता के सामने आएंगे। इसमें कुछ भी छिपाने वाली बात नहीं है। जांच में पहले भी सहयोग किया है और आगे भी पूरा सहयोग करेंगे।”
विधानसभा सत्र के बीच विधायक को बुलाने पर सवाल
सुधीर शर्मा ने कहा कि यह अपने आप में गंभीर विषय है कि जब हिमाचल प्रदेश विधानसभा का सत्र चल रहा है, उसी दौरान एक विपक्षी विधायक को इस प्रकार जांच के लिए बीच सत्र में बुलाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार का रवैया लगातार विपक्ष की आवाज को दबाने वाला बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा, “यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि विधानसभा सत्र के दौरान किसी विधायक को इस प्रकार बीच में बुलाया जा रहा है। यदि सरकार को लगता है कि जांच एजेंसियों के माध्यम से विपक्ष की आवाज दबाई जा सकती है तो यह उसकी गलतफहमी है। ऐसी राजनीति लंबे समय तक नहीं चलने वाली।”
उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक विधानसभा में प्रदेश की जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं और सरकार से जवाब मांग रहे हैं। ऐसे समय में विपक्षी विधायकों को जांच प्रक्रिया में उलझाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामला धर्मशाला का तो शिमला बुलाने की जल्दबाजी क्यों?
सुधीर शर्मा ने कहा कि संबंधित मामला धर्मशाला में है और उससे जुड़े दस्तावेज भी वहीं हैं। ऐसे में उन्हें शिमला स्थित विजिलेंस मुख्यालय में बुलाने के पीछे क्या आवश्यकता और इतनी जल्दबाजी है, यह उनकी समझ से परे है।
उन्होंने कहा, “मामला वहां का है, दस्तावेज वहां हैं, फिर मुझे यहां क्यों बुलाया गया? जांच का भी एक निर्धारित प्रोसीजर और प्रोटोकॉल होता है। आखिर इतनी जल्दबाजी में क्या जानना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं?”
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच से संबंधित सूचनाओं के सार्वजनिक होने के क्रम पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि पहला समन उन्हें 12 तारीख को प्राप्त हुआ, जबकि उसकी जानकारी 11 तारीख को ही मीडिया तक पहुंच चुकी थी।
सुधीर शर्मा ने कहा कि एक मौजूदा विधायक से जुड़े मामले में विधानसभा को भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सूचित किया जाना होता है। उन्होंने दावा किया कि वह 18 तारीख को संबंधित प्रक्रिया में उपस्थित हो चुके थे, जबकि विधानसभा को बाद में सूचित किया गया। उन्होंने कहा कि इससे पूरी कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।
जांच से नहीं डरते, हर सवाल का देंगे जवाब
शिमला, 21 अगस्त। पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक सुधीर शर्मा शुक्रवार को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के शिमला स्थित मुख्यालय पहुंचे। उनके साथ भाजपा के वरिष्ठ विधायक विपिन सिंह परमार, सतपाल सिंह सत्ती, बलबीर वर्मा, डॉ. जनक राज, इंद्रदत्त लखनपाल, राकेश जम्वाल और त्रिलोक जम्वाल भी विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे और सुधीर शर्मा के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
इसके अलावा भाजपा विधायक लोकेंद्र कुमार, दीप राज, आशीष शर्मा और पूर्ण चंद ठाकुर भी विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे।
इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए सुधीर शर्मा ने कहा कि वह कानून और जांच प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हैं। विजिलेंस द्वारा जो भी जानकारी मांगी जा रही है, उसका जवाब दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा पूछे गए कई विषयों की जानकारी पहले भी उपलब्ध करवाई जा चुकी है और आज भी मांगी गई जानकारी दी गई है।
उन्होंने कहा, “हम कानून को मानने वाले लोग हैं। जो तथ्य हैं, वे प्रदेश की जनता के सामने आएंगे। इसमें कुछ भी छिपाने वाली बात नहीं है। जांच में पहले भी सहयोग किया है और आगे भी पूरा सहयोग करेंगे।”
विधानसभा सत्र के बीच विधायक को बुलाने पर सवाल
सुधीर शर्मा ने कहा कि यह अपने आप में गंभीर विषय है कि जब हिमाचल प्रदेश विधानसभा का सत्र चल रहा है, उसी दौरान एक विपक्षी विधायक को इस प्रकार जांच के लिए बीच सत्र में बुलाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार का रवैया लगातार विपक्ष की आवाज को दबाने वाला बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा, “यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि विधानसभा सत्र के दौरान किसी विधायक को इस प्रकार बीच में बुलाया जा रहा है। यदि सरकार को लगता है कि जांच एजेंसियों के माध्यम से विपक्ष की आवाज दबाई जा सकती है तो यह उसकी गलतफहमी है। ऐसी राजनीति लंबे समय तक नहीं चलने वाली।”
उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक विधानसभा में प्रदेश की जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं और सरकार से जवाब मांग रहे हैं। ऐसे समय में विपक्षी विधायकों को जांच प्रक्रिया में उलझाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामला धर्मशाला का तो शिमला बुलाने की जल्दबाजी क्यों?
सुधीर शर्मा ने कहा कि संबंधित मामला धर्मशाला में है और उससे जुड़े दस्तावेज भी वहीं हैं। ऐसे में उन्हें शिमला स्थित विजिलेंस मुख्यालय में बुलाने के पीछे क्या आवश्यकता और इतनी जल्दबाजी है, यह उनकी समझ से परे है।
उन्होंने कहा, “मामला वहां का है, दस्तावेज वहां हैं, फिर मुझे यहां क्यों बुलाया गया? जांच का भी एक निर्धारित प्रोसीजर और प्रोटोकॉल होता है। आखिर इतनी जल्दबाजी में क्या जानना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं?”
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच से संबंधित सूचनाओं के सार्वजनिक होने के क्रम पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि पहला समन उन्हें 12 तारीख को प्राप्त हुआ, जबकि उसकी जानकारी 11 तारीख को ही मीडिया तक पहुंच चुकी थी।
सुधीर शर्मा ने कहा कि एक मौजूदा विधायक से जुड़े मामले में विधानसभा को भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सूचित किया जाना होता है। उन्होंने दावा किया कि वह 18 तारीख को संबंधित प्रक्रिया में उपस्थित हो चुके थे, जबकि विधानसभा को बाद में सूचित किया गया। उन्होंने कहा कि इससे पूरी कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।
जांच से नहीं डरते, हर सवाल का देंगे जवाब
