शिमला: मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रतिशोध की जिस राह पर चल रहे हैं, उससे किसी का लाभ नहीं होने वाला। अपनी नाकामी को छिपाने और निजी शत्रुता निकालने के लिए जिस तरह से वह बीजेपी नेताओं के खिलाफ साजिश कर रहे हैं, उसकी उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। जब से राज्यसभा चुनाव में बहुमत होने के बावजूद वह हारे हैं, तब से वह अधिकारियों के जरिए बीजेपी नेताओं को परेशान करने का षड्यंत्र कर रहे हैं। विजिलेंस के जरिए सभी के खिलाफ साजिशन कार्रवाई की जा रही है। सबसे पहले मार्च में उन्होंने विजिलेंस को आरटीआई के दायरे से बाहर किया, इसके बाद फैब्रिकेटेड शिकायतें करके लोगों को फंसाने का काम चल रहा है। जो भी मुख्यमंत्री के खिलाफ आवाज उठाएगा, उसके खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई की जा रही है। उनके खिलाफ सिर उठा रहे एक बड़े मंत्री के खिलाफ भी सीएम ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। वह मंत्री आलाकमान तक गए, फिर वह जांच ठंडे बस्ते में चली गई।

जयराम ठाकुर ने कहा कि इसी तरह मुख्यमंत्री भाजपा नेताओं के साथ विजिलेंस जांच के नाम पर अपनी खुन्नस निकाल रहे हैं, ताकि उनके खिलाफ कोई आवाज न उठाए। लेकिन वह भूल रहे हैं कि भाजपा को वह डरा नहीं सकते हैं। उनके खिलाफ एक के बाद एक आरोप लगे। उनके ही पार्टी के उपाध्यक्ष ने अटैचियां इकट्ठा करने का आरोप लगाया। लेकिन मुख्यमंत्री ने उन अटैचियों की जांच नहीं करवाई। पूरी संभावना है कि आरोप लगाने वालों पर ही जांच बैठा दी जाए। अगर जांच नहीं बैठ रही है तो यह तय है कि आरोपों में दम है, इसलिए खामोशी है। प्रदेश के लोग मित्रों द्वारा मचाई गई लूट के बारे में जानकारी चाहते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री चुप हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के लोगों ने स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनाव में पंजे को उखाड़कर फेंक दिया है। इसलिए अब अधिकारी भी उन बेजान पंजों के इशारे पर नाचना बंद करें और जिस सरकार का अपना भविष्य नहीं है, उससे अपना भविष्य न जोड़ें। वक्त बहुत कम है, यह बीतते देर नहीं लगेगी।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार ने भी सुधीर शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की, क्योंकि वह उनके भ्रष्टाचार को उजागर करते रहते हैं। होशियार सिंह पर एक के बाद एक एफआईआर हुईं, क्योंकि उन्होंने महिला मंडलों को पचास-पचास हजार रुपये देने के मामले को उजागर किया। केएल ठाकुर, उनके रिश्तेदारों और सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। आशीष शर्मा के पूरे परिजनों के खिलाफ केस बनाए गए। राजेंद्र राणा के परिजनों के खिलाफ केस बनाए गए। चैतन्य शर्मा के खिलाफ केस बनाए गए। रवि ठाकुर, देवेंद्र भुट्टो और इंद्र दत्त लखनपाल तथा उनके लोगों को परेशान किया गया।

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