शिमला: शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से वृद्धावस्था पेंशन और सहारा योजना से जुड़ी गंभीर शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। बड़ी संख्या में पात्र बुजुर्ग पहचान सत्यापन (केवाईसी) प्रक्रिया में हुई त्रुटियों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण लंबे समय से पेंशन से वंचित हैं। सरकार केवाईसी के नाम पर जरूरतमंद लोगों की पेंशन रोकने से बाज आए। चालू वित्त वर्ष के लिए घोषित एससी, एसटी, ओबीसी, माइनॉरिटी एवं समाज कल्याण के बजट को सुक्खू सरकार ने 1,618 करोड़ रुपये से घटाकर 604 करोड़ रुपये कर दिया है। बजट में 63 प्रतिशत की कटौती के कारण लोगों को पेंशन नहीं मिल रही है और इसी वजह से सरकार केवाईसी जैसी तकनीकी खामियों की आड़ में वृद्धावस्था एवं सहारा पेंशन समेत समाज कल्याण की अन्य योजनाओं को रोक रही है। इसका खामियाजा पात्र लाभार्थियों को भुगतना पड़ रहा है और अनेक लोगों की पेंशन एक वर्ष या उससे अधिक समय से शुरू नहीं हो पाई है। ऐसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं कि जब बुजुर्ग संबंधित कार्यालयों में जानकारी लेने जाते हैं तो उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि “फंड नहीं आया है” या “केस भेज दिया गया है।”

जयराम ठाकुर ने कहा कि इससे भी अधिक गंभीर विषय यह है कि सहारा योजना के कई वास्तविक लाभार्थियों को रिकॉर्ड में मृत दर्शाकर उनकी पेंशन रोक दी गई है। जिन लोगों का सत्यापन किए बिना उन्हें मृत घोषित कर पेंशन बंद कर दी गई, उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। सरकार को ऐसे सभी मामलों की जिला स्तर पर निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और प्रत्येक मामले का पुनः सत्यापन कराया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिन लाभार्थियों को गलत तरीके से मृत दर्शाकर उनकी पेंशन रोकी गई है, उनकी पेंशन तत्काल प्रभाव से बहाल की जाए तथा रोकी गई समस्त बकाया राशि भी उन्हें प्रदान की जाए। साथ ही जिन मामलों में केवाईसी की त्रुटियों या प्रशासनिक लापरवाही के कारण पात्र बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिल सकी, उन सभी त्रुटियों को समयबद्ध अभियान चलाकर ठीक किया जाए। सरकार से आग्रह है कि ऐसे मामलों में केवाईसी पूरा कराने का दायित्व पात्र लाभार्थियों के बजाय स्थानीय प्रशासन का हो। इसकी समुचित निगरानी की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की कोताही की संभावना न रहे।

जयराम ठाकुर ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन और सहारा योजना से जुड़े सभी लंबित मामलों का विशेष अभियान चलाकर शीघ्र निपटारा किया जाए। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य स्तर पर लापरवाही, गलत केवाईसी या तथ्यात्मक त्रुटि सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय कर उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि वृद्धजन समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उन्हें सम्मान, संवेदनशीलता और समय पर सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। सरकार को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि प्रदेश का कोई भी पात्र बुजुर्ग अथवा सहारा योजना का लाभार्थी अपनी पेंशन से वंचित न रहे।

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