विधायक सुरेश कुमार और कै. रणजीत सिंह ने आज सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेन्द्र राणा द्वारा 20 मार्च, 2026 को सोलन में की गई प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि राजेन्द्र राणा द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत, भ्रामक और तथ्यों से कोसों दूर हैं। विधायकों ने कहा कि यह बयानबाजी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और मीडिया में जगह बनाने की एक हताश कोशिश के अलावा कुछ नहीं है। बिना किसी प्रमाण के झूठ का ऐसा पुलिंदा तैयार करना यह दर्शाता है कि विपक्ष के पास जनहित के वास्तविक मुद्दों का पूर्ण अभाव है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास को लेकर जिस प्रकार की कहानियां गढ़ी गई हैं, वह पूरी तरह निराधार हैं। मुख्यमंत्री के सभी कार्यक्रम निर्धारित होते हैं। इस तरह की मनगढ़ंत बातें करना केवल सनसनी फैलाने का प्रयास है। सलाहकारों को लेकर की गई टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक है। जबकि उनके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत सुधार और कार्यान्वयन को गति मिली है। उनको लेकर आपत्तिजनक बातें कहना विपक्ष की हताशा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि एंट्री टैक्स को लेकर गलत आंकड़े पेश किए गए हैं। वास्तविकता यह है कि टैक्स संरचना में किए गए बदलावों का उद्देश्य राजस्व सुदृढ़ करना और विकास कार्यों को गति देना है। पिछले वर्षों में राज्य का अपना राजस्व लगातार बढ़ा है, जिससे सड़कों, स्वास्थ्य और शिक्षा पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। केवल एक आंकड़े को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना भ्रामक है। हमीरपुर मेडिकल कॉलेज के पास जमीन को लेकर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। जमीन से जुड़े सभी लेन-देन विधिक प्रक्रियाओं के तहत होते हैं। बिना किसी प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना केवल राजनीतिक दुर्भावना का परिचायक है।
विधायकों ने कहा कि प्रदेश में वेतन कटौती और आर्थिक आपातकाल जैसी बातें पूरी तरह काल्पनिक हैं। राज्य सरकार ने पिछले समय में कर्मचारियों और पेंशनरों पर हजारों करोड़ रुपये के लाभ दिए हैं। डी.ए. और अन्य भत्तों को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा रहा है। वेतन कटौती की बात फैलाकर कर्मचारियों में भ्रम और भय पैदा करना पूरी तरह निंदनीय है।
विधायकों ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर भी गलत चित्र पेश किया गया है। यह सही है कि राज्य पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है, लेकिन इसमें से बड़ा हिस्सा पूर्व सरकारों के समय का है। वर्तमान सरकार ने वित्तीय अनुशासन के तहत राजस्व बढ़ाने और अनावश्यक खर्चों में कटौती के कदम उठाए हैं। ठेकेदारों को भुगतान पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है और अब तक हजारों करोड़ रुपये की देनदारियां निपटाई जा चुकी हैं। बजट घोषणाओं को झूठा बताना सरासर गलत है। बजट के माध्यम से बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये के प्रावधान किए गए हैं, जिनका लाभ सीधे आम जनता तक पहुंच रहा है। जमीनी स्तर पर कार्य स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की बयानबाजी केवल प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। विपक्ष बार-बार झूठे आंकड़े और भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह करना चाहता है, लेकिन प्रदेश की जागरूक जनता सच्चाई को समझती है। प्रदेश सरकार विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण के अपने एजेंडे पर मजबूती से आगे बढ़ रही है। हजारों करोड़ रुपये की विकास योजनाएं धरातल पर क्रियान्वित हो रही हैं और आने वाले समय में इनके और बेहतर परिणाम सामने आएंगे।  
विधायकों ने कहा कि इस प्रकार के बेबुनियाद आरोप न तो सरकार की कार्यशैली को प्रभावित कर सकते हैं और न ही जनता के विश्वास को डिगा सकते हैं। विपक्ष को यह समझ लेना चाहिए कि हिमाचल में अब तथ्य और काम की राजनीति चलेगी, न कि झूठ और भ्रम की।

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