गुमराह करने की राजनीति छोड़, आरडीजी पर बात करें जय राम ठाकुरः कांग्रेस
कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश की जनता को गुमराह करने के बजाय राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए। मंत्रियों ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत आरडीजी राज्यों का अधिकार है। इसे बंद करने से हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 10 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में जय राम ठाकुर को इस मुद्दे पर भाजपा की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं (ईएपी) का हवाला नेता प्रतिपक्ष दे रहे हैं, वे अनुदान नहीं बल्कि ऋण हैं। ऋण का अर्थ वह स्वयं भली-भांति जानते हैं। इसके विपरीत आरडीजी एक ग्रांट है और हिमाचल प्रदेश के लोगों का यह संवैधानिक अधिकार है। विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे पर भाजपा का रुख प्रदेश की 75 लाख जनता के सामने स्पष्ट हो चुका है। अब प्रदेश की जनता समझ चुकी है कि भाजपा प्रदेश हित के मुद्दों पर भी राजनीति कर रही है और विपक्ष को हिमाचल प्रदेश के लोगों के अधिकारों से कोई वास्तविक सरोकार नहीं है। इसलिए लोग उनके झांसे में नहीं आने वाले।
मंत्रियों ने कहा कि जन दबाव के चलते ही जय राम ठाकुर को केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात का ड्रामा करना पड़ा, लेकिन वे हिमाचल के हितों को प्रभावी ढंग से उनके समक्ष रखने में विफल रहे। बेहतर होता कि वे आरडीजी की बहाली के लिए ठोस और प्रभावी पैरवी करते तथा कोई स्पष्ट आश्वासन लेकर लौटते। दुर्भाग्यवश, दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष हिमाचल के अधिकारों की मजबूती से वकालत करने का साहस भी वे नहीं दिखा सके।
चौधरी चंद्र कुमार और रोहित ठाकुर ने कहा कि भाजपा के किसी भी नेता ने अब तक हिमाचल प्रदेश को आरडीजी बहाल करने के समर्थन में एक शब्द भी नहीं कहा है। जबकि कुछ माह पूर्व 15वें एवं 16वें वित्त आयोग के समक्ष स्वयं जय राम ठाकुर ने प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और आर्थिक चुनौतियों का हवाला देते हुए आरडीजी की आवश्यकता पर जोर दिया था। अब उनके बदले हुए सुर प्रदेश की जनता की समझ से परे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हिमाचल प्रदेश के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं करेगी और हर मंच पर प्रभावी ढंग से अपने अधिकारों की बात रखेगी।
