“एक तरफ टैक्स का डंडा, दूसरी तरफ केंद्र की ऐतिहासिक एफटीए डील पर भ्रम — कांग्रेस की दोहरी नीति उजागर”
शिमला: भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रही हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने फल-सब्जी कारोबार पर 1% मार्केट फीस फिर से लागू कर प्रदेश के किसानों, बागवानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय सीधे तौर पर मंडियों में काम करने वाले आढ़तियों, निजी मार्केट यार्ड संचालकों तथा दूसरे राज्यों से आने वाले कारोबारियों को प्रभावित करेगा और इसका असर अंततः किसानों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने 2014 की अधिसूचना को रद्द कर एपीएमसी के माध्यम से शुल्क वसूली शुरू की है, जिससे सालाना 40-50 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय का अनुमान है, लेकिन यह आय जनता की जेब से निकलेगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार “ऊँट के मुंह में जीरा” जितनी राहत देकर “हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और” जैसी नीति अपना रही है—बाहर से किसानों की चिंता का दिखावा और अंदर से उन पर आर्थिक बोझ।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि एक ओर राज्य सरकार स्थानीय किसानों और सेब बागवानों पर शुल्क का बोझ डाल रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार की ऐतिहासिक एफटीए पहल पर भ्रामक बयानबाजी कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की यह राजनीति “नाच न जाने आंगन टेढ़ा” वाली है—अपनी गलत नीतियों का ठीकरा केंद्र पर फोड़ना और खुद जिम्मेदारी से बचना।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की नीतियां किसान हितैषी नहीं बल्कि राजस्व जुटाने के लिए जल्दबाजी में लिए गए फैसलों का परिणाम हैं। भारद्वाज ने कहा कि भाजपा किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाती रहेगी और कांग्रेस के भ्रामक प्रचार की पोल खोलती रहेगी।
