जयराम ठाकुर राजनीति और बदले की भावना से काम करके सरकार का मन नहीं भरा तो उन्होंने विभागों को भी भाजपा के खिलाफ दुष्प्रचार करने हेतु लगा दिया। उन्होंने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उसे पोस्ट का भी जिक्र किया जिसमें उसने भाजपा के चुनाव चिन्ह को उल्टा करके लगाया था और बेहद निचले स्तर की टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि जब दो साल बाद आप की सरकार नहीं होगी तब आपका क्या होगा इस बारे में भी सोचिए। ऐसे अधिकारियों को सरकार के साथ अपना भविष्य नहीं जोड़ना चाहिए। सभी को सीधे शब्दों में एक सलाह है कि डॉन्ट क्रॉस द लिमिट।
पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कांगड़ा कार्निवल में वसूली के लिए सरकार द्वारा पत्र निकाला गया है। सरकारी कार्यक्रमों का खर्च प्रदेश के लोग क्यों उठाएं? इस तरह से पहले कभी नहीं हुआ है कि सरकार द्वारा पत्र जारी किया गया है? यह सरकार द्वारा अधिसूचित कार्यक्रम है। यदि पत्र जारी ही किया जाना था तो वह डीसी द्वारा क्यों नहीं जारी किया गया?पत्र में अकाउंट नंबर क्यों नहीं दिया गया है? क्या यह कैश वसूली का प्रयास है? अगर लोग दान ही रहे हैं तो कम से कम उन्हें आयकर की विभिन्न धाराओं के तहत आयकर में छूट तो मिल सके।
प्रदेश में इस तरीके के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में फर्जी बिल वाउचर छापने और उससे भारी संख्या में उगाही के आरोप पहले भी कांग्रेस के कुछ नेताओं पर लग चुके हैं। कहीं इस तरीके से डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफीसर द्वारा पत्र जारी करवा कर दबाव बनाना और इस तरीके से वसूली करने की यह पुनरावृत्ति तो नहीं है
