शिमला। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व पर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मंत्री अपने मानसिक संतुलन और राजनीतिक विवेक दोनों खो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जगत सिंह नेगी की अपनी पार्टी में ही कोई राजनीतिक स्वीकार्यता नहीं रह गई है। उनके ही जिले में उनकी इच्छा के विरुद्ध कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष नियुक्त कर दिया, जिसकी हताशा और कुंठा वह भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व पर अनर्गल बयानबाजी करके निकाल रहे हैं।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि जगत सिंह नेगी को यह समझ लेना चाहिए कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर अभद्र टिप्पणी करके वह अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता सिद्ध नहीं कर सकते। यदि उन्होंने इस प्रकार की अमर्यादित भाषा का प्रयोग बंद नहीं किया तो भाजपा कार्यकर्ता लोकतांत्रिक तरीके से उनका सार्वजनिक विरोध करेंगे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार सत्ता में आने से पहले नियमित भर्तियों का वादा कर युवाओं को बड़े-बड़े सपने दिखाकर सत्ता में आई थी, लेकिन ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो नियमित भर्तियां हुईं और न ही युवाओं को रोजगार मिला। उल्टा, तत्कालीन कर्मचारी चयन आयोग में कथित अनियमितताओं का हवाला देकर सरकार ने आयोग को बंद कर दिया, लेकिन आज तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही यह बताया गया कि दोषी कौन थे। यदि वास्तव में इतने बड़े घोटाले हुए थे तो सरकार श्वेत पत्र जारी कर प्रदेश की जनता और युवाओं को सच्चाई बताए।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय लगभग 700 युवाओं की नियुक्तियां अंतिम चरण में थीं, लेकिन कांग्रेस सरकार ने उन्हें भी रोक दिया और हजारों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। आज प्रदेश का बेरोजगार युवा सरकार से पूछ रहा है कि नियमित भर्ती का वादा कहां गया।

संदीपनी भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पारदर्शी भर्ती व्यवस्था समाप्त कर अपने चहेतों, रिश्तेदारों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बैकडोर से नियुक्तियां देने का नया तंत्र विकसित कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां मंत्रियों और कांग्रेस नेताओं के प्रभाव से उनके परिजनों और समर्थकों को सरकारी संस्थानों में नियुक्तियां दी गईं, जबकि योग्य और पात्र युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह वही व्यवस्था परिवर्तन है जिसकी कांग्रेस बात करती थी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनावों में आउटसोर्स भर्ती समाप्त करने और नियमित नियुक्तियां देने का वादा किया था, लेकिन आज आउटसोर्स भर्ती भी वित्त विभाग की स्वीकृति के नाम पर राजनीतिक हस्तक्षेप का माध्यम बन चुकी है। जिस विभाग में सत्ता पक्ष के लोगों को लाभ पहुंचाना होता है, वहीं स्वीकृतियां दी जाती हैं। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और मेरिट के सिद्धांतों के विपरीत है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस एक ओर केंद्र सरकार पर परीक्षा प्रणाली को लेकर सवाल उठाती है, जबकि दूसरी ओर हिमाचल में कर्मचारी चयन आयोग मामले की जांच आज तक पूरी नहीं कर सकी। केंद्र सरकार ने जहां पेपर लीक मामलों में सीबीआई जांच, दोषियों की गिरफ्तारी, पुनः परीक्षा और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे कठोर कदम उठाए हैं, वहीं हिमाचल सरकार अपने ही वादों और जांचों पर चुप्पी साधे बैठी है।

उन्होंने कहा कि देश लोकतंत्र से चलता है, अराजकता से नहीं। संसद में जिन विषयों पर चर्चा होनी चाहिए, उन पर बहस से भागकर कांग्रेस सड़क पर राजनीति कर रही है। राहुल गांधी का प्रधानमंत्री आवास तक जाना और विपक्ष द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। कांग्रेस को पहले हिमाचल के युवाओं को यह बताना चाहिए कि भर्ती घोटालों की जांच कहां पहुंची, नियमित भर्तियां कब होंगी और बैकडोर नियुक्तियों पर सरकार कब जवाब देगी।

अंत में संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश के युवाओं के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से उठाती रहेगी। कांग्रेस सरकार को राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, लंबित भर्तियां पूरी करने और हिमाचल के बेरोजगार युवाओं के साथ किए गए वादों को पूरा करना चाहिए।

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