हाईकोर्ट ने कहा—चुनाव ट्रायल में साक्ष्य और गवाह आवश्यक, महाजन की गवाह सूची सही और वैध
शिमला:
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन को चुनाव याचिका मामले में महत्वपूर्ण राहत मिली है। उनके अधिवक्ता विक्रांत ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही याचिका में आज माननीय न्यायालय ने अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें गवाहों की आवश्यकता और जिरह (cross-examination) को लेकर आपत्ति जताई गई थी।
विक्रांत ठाकुर ने बताया कि अभिषेक मनु सिंघवी की ओर से यह तर्क दिया गया था कि इस मामले में गवाहों की जरूरत नहीं है और न ही विस्तृत साक्ष्य की आवश्यकता है। इस पर न्यायालय में विस्तृत बहस हुई थी।
आज दिए गए निर्णय में माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चुनाव याचिका एक ट्रायल प्रकृति (trial-based proceeding) का मामला है, जिसमें साक्ष्य (evidence) और गवाहों (witnesses) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
न्यायालय ने यह भी माना कि हर्ष महाजन की ओर से प्रस्तुत की गई गवाहों की सूची उचित, वैध और प्रक्रिया के अनुरूप है। इसलिए सिंघवी की ओर से दायर की गई अर्जी को खारिज कर दिया गया।
भाजपा की ओर से इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत बताते हुए कहा गया कि यह फैसला चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है।
अधिवक्ता विक्रांत ठाकुर ने कहा कि
“माननीय न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव संबंधी मामलों में साक्ष्य और गवाहों की अनदेखी नहीं की जा सकती। यह निर्णय न्याय और निष्पक्ष सुनवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।”
राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि
“सच्चाई को दबाने की हर कोशिश नाकाम होगी। कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता अदालत में भी सच्चाई से बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन न्यायालय ने साफ कर दिया कि सच्चाई सामने आएगी और पूरी पारदर्शिता के साथ आएगी। यह सिर्फ कानूनी जीत नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जीत है।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि
“जब तथ्य कमजोर हों तो कांग्रेस साक्ष्यों से भागती है, लेकिन भाजपा सच्चाई के साथ खड़ी है और हर मंच पर जवाब देने के लिए तैयार है।”
इस फैसले के बाद अब मामले की सुनवाई आगे साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जारी रहेगी।
