₹54,928 करोड़ का घटा बजट, 80% खर्च तय, केवल 20% विकास – हिमाचल को कर्ज और आर्थिक संकट की ओर धकेल रही कांग्रेस

शिमला,

भाजपा नेता एवं विधायक रणधीर शर्मा ने विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्रस्तुत बजट पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह बजट नहीं बल्कि एक लंबा राजनीतिक भाषण था। उन्होंने कहा कि बजट जैसे महत्वपूर्ण मंच का उपयोग विकास और आर्थिक दिशा तय करने के बजाय केंद्र सरकार, पिछली भाजपा सरकार और विपक्ष की आलोचना में किया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपने भाषण में तथ्यों और आंकड़ों के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में अधिक व्यस्त रहे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार “भाजपा फोबिया” से ग्रस्त है। उन्होंने कहा कि बजट का उद्देश्य प्रदेश के भविष्य की आर्थिक रूपरेखा प्रस्तुत करना होता है, लेकिन इस बजट में ऐसी कोई स्पष्ट दिशा दिखाई नहीं देती।

रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा बार-बार उठाया जा रहा Revenue Deficit Grant (RDG) का मुद्दा पूरी तरह राजनीतिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि RDG कोई संवैधानिक अधिकार नहीं बल्कि वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित अस्थायी व्यवस्था थी, जिसका समाप्त होना पहले से तय था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर जनता को भ्रमित कर रही है।

उन्होंने बजट के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह बजट प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति का प्रमाण है।

कुल बजट आकार ₹54,928 करोड़ है, जो पिछले वर्ष से ₹3,586 करोड़ कम है। राजस्व प्राप्तियां भी घटकर ₹44,537 करोड़ से ₹40,361 करोड़ होने का अनुमान है। कमिटेड लायबिलिटीज (वेतन, पेंशन, ब्याज व ऋण अदायगी) लगभग 80% तक पहुंच चुकी हैं, जबकि विकास कार्यों के लिए मात्र 20% बजट बचता है।

उन्होंने कहा कि जब ₹100 में से ₹80 पहले से तय खर्चों में चला जाएगा, तो प्रदेश में विकास कार्य कैसे होंगे? यह स्थिति हिमाचल के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक है।

रणधीर शर्मा ने सरकार की आर्थिक नीतियों को विफल बताते हुए कहा कि लगातार टैक्स और सेस बढ़ाने के बावजूद राजस्व संग्रह में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही है। महंगाई और ऊंचे करों के कारण लोग हिमाचल के बजाय पड़ोसी राज्यों से खरीदारी कर रहे हैं, जिससे राज्य की आय पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने कर्ज लेने के मामले में भी रिकॉर्ड बना दिया है। पिछले तीन वर्षों में लिया गया कर्ज पिछली सरकारों के पांच वर्षों से अधिक है और प्रदेश का कुल कर्ज ₹1 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है, जो गंभीर वित्तीय संकट की ओर संकेत करता है।

उन्होंने कहा कि बजट में निवेश बढ़ाने, उद्योग स्थापित करने और जीएसडीपी बढ़ाने की कोई ठोस योजना नहीं है। उद्योगों के लिए प्रोत्साहन नहीं दिया जा रहा, बिजली दरें बढ़ाकर निवेश को हतोत्साहित किया जा रहा है और नए आर्थिक अवसरों का सृजन नहीं किया जा रहा।

रणधीर शर्मा ने बजट घोषणाओं को “जुमला” बताते हुए कहा कि पिछली घोषणाएं भी पूरी नहीं हुईं।

ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने, कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने, नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने और रोजगार सृजन जैसी घोषणाएं आज भी अधूरी हैं।

उन्होंने कहा कि गरीबों और युवाओं के नाम पर की गई घोषणाएं भी भ्रामक हैं। 300 यूनिट मुफ्त बिजली और ₹1500 सहायता जैसी योजनाओं में स्पष्टता का अभाव है और इनका वास्तविक लाभ संदिग्ध है।

रणधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश की अधिकांश योजनाएं केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही हैं, फिर भी कांग्रेस सरकार केंद्र को दोष देने का प्रयास कर रही है, जो पूरी तरह विरोधाभासी है।

अंत में उन्होंने कहा:

“यह बजट दिशाहीन, गुमराह करने वाला और आर्थिक रूप से कमजोर दस्तावेज है। इसमें न आत्मनिर्भर हिमाचल की सोच है, न विकास का रोडमैप। यह बजट प्रदेश को कर्ज, महंगाई और आर्थिक संकट की ओर ले जाने वाला है।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया तो प्रदेश को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

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