पंचायत चुनाव के बाद अब शहरी निकाय चुनावों से भी भाग रही कांग्रेस, चुनाव आयोग से टकराव की राजनीति कर रही सरकार
शिमला।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार लगातार लोकतांत्रिक प्रक्रिया से भागने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार को जनता के बीच अपनी लोकप्रियता पर भरोसा नहीं है, इसलिए वह हर चुनाव को टालने की कोशिश कर रही है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि हाल ही में शहरी विकास विभाग द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारियों और उपायुक्तों को 53 शहरी निकायों में आरक्षण रोस्टर लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन दूसरी ओर सरकार नए बनाए गए 21 शहरी निकायों में चुनाव नहीं करवाना चाहती। इससे साफ होता है कि कांग्रेस सरकार चुनाव कराने के बजाय उन्हें टालने की रणनीति पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी शहरी निकायों में चुनाव एक साथ करवाए जाएंगे, क्योंकि अलग-अलग चुनाव कराने से बार-बार आचार संहिता लगती है और विकास कार्य प्रभावित होते हैं। इसके बावजूद सरकार आयोग पर दबाव बनाने और प्रक्रिया में देरी करने का प्रयास कर रही है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस सरकार चुनावों से भाग रही है। इससे पहले भी सरकार ने पंचायत चुनावों को टालने का प्रयास किया था और अब नगर निकाय चुनावों को लेकर भी यही रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को आगामी चुनावों में बड़ी हार का डर सता रहा है, इसलिए वह चुनाव कराने से बचना चाहती है।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कुल 75 नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतें हैं, जिनमें से 47 से अधिक निकायों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है और सरकार ने इन स्थानों पर प्रशासक नियुक्त कर रखे हैं। नियमों के अनुसार इन निकायों में चुनाव समय पर होने चाहिए थे, लेकिन सरकार ने आपदा एक्ट का सहारा लेकर चुनाव टालने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि अब हिमाचल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 31 मार्च से पहले आरक्षण रोस्टर लगाना और 31 मई से पहले चुनाव कराना अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद सरकार की मंशा चुनाव टालने की दिखाई दे रही है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग द्वारा वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और इसका ड्राफ्ट प्रकाशित किया जा चुका है। जनता से 19 मार्च तक आपत्तियां मांगी गई हैं, जिनका निपटारा 23 मार्च तक किया जाएगा। इसके बाद मंडलायुक्त 1 अप्रैल तक अपीलों का निपटारा करेंगे और 2 अप्रैल तक अंतिम परिसीमन आदेश जारी किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार लगातार चुनाव आयोग से टकराव की राजनीति कर रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र में चुनाव से भागने की राजनीति ज्यादा समय तक नहीं चल सकती।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान में विश्वास रखती है और सरकार से मांग करती है कि नगर निकाय चुनावों को लेकर अनावश्यक देरी बंद कर समय पर चुनाव करवाए जाएं, ताकि जनता को अपना जनप्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिल सके।
नौतोड़ का समाधान करने में विफल मंत्री जगत नेगी: सूरत नेगी
नौतोड़ और जनजातीय अधिकारों पर सच्चाई छिपाने के लिए राज्यपाल को बना रहे निशाना
कहा – जनजातीय मंत्री होकर भी जनजातीय हितों में विफल, अब संवैधानिक पदों पर हमला कर रहे हैं जगत सिंह नेगी
शिमला: भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सूरत नेगी ने जनजातीय मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा राज्यपाल के विरुद्ध दिए गए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान बताया है। भाजपा प्रवक्ता सूरत नेगी ने कहा कि मंत्री नेगी का यह रवैया न केवल एक संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला है, बल्कि यह उनके राजनीतिक अहंकार और प्रशासनिक असफलता को भी उजागर करता है।
भाजपा प्रवक्ता सूरत नेगी ने स्पष्ट कहा कि जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े नौतोड़ जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर जिस तरह से मंत्री जगत सिंह नेगी लगातार भ्रामक बयान दे रहे हैं, उससे साफ है कि वे अपनी सरकार की नाकामियों को छिपाने के लिए राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद को निशाना बना रहे हैं।
सूरत नेगी ने कहा कि नौतोड़ का विषय आज का नहीं है, बल्कि पिछले 20-25 वर्षों से यह मुद्दा चर्चा में रहा है। वर्ष 2006 में जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और स्वयं जगत सिंह नेगी विधायक थे, उस समय ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि नौतोड़ की जमीन केवल “लैंडलेस” यानी भूमिहीन लोगों को ही दी जाएगी। 1975 के अधिनियम में लैंडलेस की स्पष्ट परिभाषा दी गई थी और उसी आधार पर यह शर्त लागू की गई।
भाजपा प्रवक्ता सूरत नेगी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने जनता को गुमराह करने का काम किया। उस समय फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट, 1980 को आंशिक रूप से निलंबित करने की बात कही गई, लेकिन साथ ही 2006 में लगाई गई “लैंडलेस” की शर्त को नहीं हटाया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि वास्तव में किसी भी व्यक्ति को नौतोड़ का लाभ मिल ही नहीं सकता था। सूरत नेगी ने कहा कि यह पूरी तरह से जनजातीय क्षेत्रों के साथ धोखा था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जब प्रदेश में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, तब इस पूरे मामले का गहन अध्ययन किया गया। भाजपा सरकार ने 2006 में लगाई गई उस शर्त को हटाने का रास्ता निकाला ताकि जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को वास्तव में नौतोड़ का लाभ मिल सके। लेकिन उस समय फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण इस पर तत्काल निर्णय लेना संभव नहीं था।
सूरत नेगी ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान की पाँचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल को कुछ विशेष अधिकार जरूर दिए गए हैं, लेकिन किसी केंद्रीय कानून को निलंबित करना इतना सरल नहीं है जितना कि मंत्री नेगी जनता को बताने की कोशिश कर रहे हैं। बिना कानूनी प्रक्रिया और नियमों के किसी को भी जमीन नहीं दी जा सकती।
भाजपा प्रवक्ता सूरत नेगी ने कहा कि आज जनजातीय मंत्री होने के बावजूद जगत सिंह नेगी अपने क्षेत्र और पूरे जनजातीय समाज के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह असफल साबित हुए हैं। भाजपा सरकार के समय ट्राइबल सब प्लान के तहत लगभग 400 करोड़ रुपये का बजट तीनों जनजातीय विधानसभा क्षेत्रों के लिए रखा गया था, जिसे वर्तमान कांग्रेस सरकार ने घटाकर लगभग 150 करोड़ रुपये कर दिया है। इससे साफ है कि वास्तव में जनजातीय विरोधी नीति कौन चला रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फॉरेस्ट राइट्स एक्ट (FRA) के तहत जनजातीय लोगों को भूमि अधिकार देने की प्रक्रिया भी वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बेहद धीमी रही है। भाजपा सरकार के समय जहां इस दिशा में पहल शुरू हुई थी, वहीं आज तीन वर्षों में भी बड़ी संख्या में लंबित मामलों का समाधान नहीं हो पाया है।
अंत में सूरत नेगी ने कहा कि मंत्री नेगी को अपने व्यवहार और भाषा पर संयम रखना चाहिए। किसी भी संवैधानिक पद, विशेषकर राज्यपाल के विरुद्ध इस प्रकार के बयान देना न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है बल्कि इससे जनजातीय क्षेत्रों के वास्तविक मुद्दे भी पीछे छूट जाते हैं।
सूरत नेगी ने कहा कि यदि मंत्री नेगी वास्तव में जनजातीय समाज के हितैषी हैं तो उन्हें बयानबाजी छोड़कर केंद्र सरकार और राज्यपाल से संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि नौतोड़, फॉरेस्ट राइट्स और वाइब्रेंट विलेज योजना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ठोस समाधान निकल सके।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास और अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी सदैव प्रतिबद्ध रही है और भविष्य में भी इन मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी।
