पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कितने बड़े अर्थशास्त्री हैं वह पूरा प्रदेश और देश देख रहा है। हर छोटी से बड़ी संस्था सरकार की नाकामी, दूरगामी सोच से रहित योजनाओं को चिन्हित कर रही है। लोगों को ना समय पर वेतन मिल रहा है और नहीं पेंशन। मेडिकल बिल समेत अन्य सुविधाओं की बात तो बहुत दूर की है। हमने भी अपनी सरकार में इससे बुरा दौर देखा है। कोविड के समय पूरी दुनिया के आर्थिक हालात कैसे थे, तभी हमने विकास के काम रोक ना सुविधाओं में कमी की और ना ही किसी कर्मचारी का 1 दिन का वेतन काटा।
जयराम ठाकुर ने कहा कि वह हमें एक्सटर्नल ऐडेड प्रोजेक्ट की प्रक्रिया के बारे में बता रहे हैं। उन्हें यह बताना चाहिए कि ऐसे प्रोजेक्ट में केंद्र की हिस्सेदारी कितनी होती है? बिना केंद्र के सहयोग कैसे प्रोजेक्ट मिलते हैं? क्या नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद हिमाचल प्रदेश को योजनाओं में केंद्र की हिस्सेदारी बढ़ाकर 90 प्रतिशत नहीं की थी? सभी बातों की सिर्फ एक बात यह है कि यदि केंद्र सरकार मदद कर रही है तो उसका आभार जताना एक सामान्य शिष्टाचार है, जो सरकार को करना चाहिए।
